जा तू इत्मिनान रख, खफ़ा नहीं तुझसे
दूरी हुई तो क्या मग़र जुदा नहीं तुझसे
© मनीषा शुक्ला
3 Oct 2017
जुदा नहीं तुझसे
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अशआर
7 Sept 2017
लगी जीने जो तुम से दूर होकर

बहुत ख़ाली मिली भरपूर होकर
लगी जीने जो तुम से दूर होकर
ख़ताओं इन्तेज़ारी ख़त्म कर लो
सजाएं आ गईं मंज़ूर होकर
छुआ जिस पल मुझे तुमने, तभी से
मैं देखूँ आईना मग़रूर होकर
तुम्हारी क़ुर्बतें तुमको मुबारक
बहुत खुश हूं मैं तुमसे दूर होकर
मिली उनसे नहीं "हां" में गवाही
मैं "ना" कहती रही मजबूर होकर
तुम्हारे लब पे हैं ग़ैरों के चर्चे
हमें हासिल यही मशहूर होकर
दिया कब वक़्त उनको मौत ने जो
जिए मसरूफियत में चूर होकर
© मनीषा शुक्ला
28 Aug 2017
प्यास का आदर
प्रीत के अनुप्रास का आदर किया
आज जल ने प्यास का आदर किया
नेह का सत्कार जब तुमने किया
उंगलियों ने थाम लीं तब उंगलियां
इक पहर तक थी अकेली नींद, अब
साथ इनके आस, सपने, लोरियां
चैन ने संत्रास का आदर किया
आज जल ने प्यास का आदर किया
हम विकलता के सजीले चित्र थे
और तुम तपलीन विश्वामित्र थे
हम अभागी भूमिजा युग-युग रहीं
तुम सदा श्रीराम थे, सौमित्र थे
धीर ने उच्छवास का आदर किया
आज जल ने प्यास का आदर किया
© मनीषा शुक्ला
आज जल ने प्यास का आदर किया
नेह का सत्कार जब तुमने किया
उंगलियों ने थाम लीं तब उंगलियां
इक पहर तक थी अकेली नींद, अब
साथ इनके आस, सपने, लोरियां
चैन ने संत्रास का आदर किया
आज जल ने प्यास का आदर किया
हम विकलता के सजीले चित्र थे
और तुम तपलीन विश्वामित्र थे
हम अभागी भूमिजा युग-युग रहीं
तुम सदा श्रीराम थे, सौमित्र थे
धीर ने उच्छवास का आदर किया
आज जल ने प्यास का आदर किया
© मनीषा शुक्ला
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26 Jul 2017
अनबन
आज मेरी इन दो आंखों में फिर से थोड़ी अनबन है
एक ने तुमको देखा है और एक तुम्हारा दरपन है
© मनीषा शुक्ला
एक ने तुमको देखा है और एक तुम्हारा दरपन है
© मनीषा शुक्ला
25 Jul 2017
अकेलापन
ज़िन्दगी में थोड़ा अकेलापन बहुत ज़रूरी है। क्योंकि यही वो जगह है जहां आपकी मुलाक़ात आपसे होती है।
© मनीषा शुक्ला
© मनीषा शुक्ला
7 May 2017
5 Apr 2017
अधूरा ख़्वाब
जो रह-रह कर उमड़ता है, वही सैलाब रक्खा है
ज़रा सी आब रक्खी है, ज़रा सा ताब रक्खा है
अभी नींदों से कह दो मेरी आंखों में नहीं आएँ
मेरी पलकों के नीचे इक अधूरा ख़्वाब रक्खा है
©मनीषा शुक्ला
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