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1 Feb 2019

सुरूर

नया-नया सा सुरूर है वो, अभी नया है कमाल उसका
अभी नज़र में वही रवां है, अभी नया है जमाल उसका
न रात गुज़रे, न चाँद भाए, न नींद आए, न जान जाए
अभी जगाएगा रात भर वो, अभी नया है ख़याल उसका

©मनीषा शुक्ला

10 Jan 2019

हमारे भाव बोलेंगे, तभी भाषा सफल होगी

करम जो श्रेष्ठ हो,फल की तभी आशा सफल होगी
उनींदे नैन की हर एक अभिलाषा सफल होगी
भले गुणगान हम करते रहें निज मातृ-भाषा का
हमारे भाव बोलेंगे, तभी भाषा सफल होगी

©मनीषा शुक्ला