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6 Sept 2021
नहीं क़ाबू मुक़द्दर पर
सभी हैं जीतने वाले, नहीं कोई सिकन्दर पर
नदी के पास नइया है, नहीं माँझी मयस्सर पर
ख़ुदा ने इस क़दर इंसान को मजलूम रक्खा है
लक़ीरें मुट्ठियों में हैं, नहीं क़ाबू मुक़द्दर पर
©मनीषा शुक्ला
27 May 2021
इसलिए चाँद रोज़ जगता है
फिर किसी के लिए सुलगता है
रात भर रोज़ सबको ठगता है
खो गया है बाँह का तकिया
इसलिए चाँद रोज़ जगता है
©मनीषा शुक्ला
रात भर रोज़ सबको ठगता है
खो गया है बाँह का तकिया
इसलिए चाँद रोज़ जगता है
©मनीषा शुक्ला
22 Mar 2021
तो फिर किस काम का है दिल ?
तुम्हारा ही तुम्हारा है, हमारा नाम का है दिल
फ़िदा रंगीनियों पर है, किसी गुलफ़ाम का है दिल
बला से टूटता है तो किसी दिन टूट ही जाए
अगर तुम पर नहीं आया तो फिर किस काम है दिल
©मनीषा शुक्ला
17 Mar 2021
हमें बदनाम करने में कोई मशहूर हो जाता
हमारी आँख का काजल, किसी का नूर हो जाता
वफ़ा से बेवफ़ाई का यही दस्तूर हो जाता
किसी के काम आ जाती अगर रुसवाइयाँ अपनी
हमें बदनाम करने में कोई मशहूर हो जाता
©मनीषा शुक्ला
15 Mar 2021
हमें बदनाम करने में कोई मशहूर हो जाता
हमारी आँख का काजल, किसी का नूर हो जाता
वफ़ा से बेवफ़ाई का यही दस्तूर हो जाता
किसी के काम आ जाती अगर रुसवाइयाँ अपनी
हमें बदनाम करने में कोई मशहूर हो जाता
© मनीषा शुक्ला
वफ़ा से बेवफ़ाई का यही दस्तूर हो जाता
किसी के काम आ जाती अगर रुसवाइयाँ अपनी
हमें बदनाम करने में कोई मशहूर हो जाता
© मनीषा शुक्ला
9 Mar 2021
किसी के भी नहीं होते
किसी से भी बिछड़कर हम कभी भी क्यों नहीं रोते
घड़ी भर ख़्वाब को भरकर नज़र में क्यों नहीं सोते
अजब उलझी पहेली हैं, अधूरे हैं न पूरे हम
सभी को चाहते हैं पर किसी के भी नहीं होते
©मनीषा शुक्ला
घड़ी भर ख़्वाब को भरकर नज़र में क्यों नहीं सोते
अजब उलझी पहेली हैं, अधूरे हैं न पूरे हम
सभी को चाहते हैं पर किसी के भी नहीं होते
©मनीषा शुक्ला
5 Feb 2021
यही सबकी कहानी है
नहीं चलती खिलौनों की कभी तक़दीर के आगे
जुड़े हैं आसमानों में कहीं पर प्रीत के धागे
यही है बेबसी सबकी, यही सबकी कहानी है
किसी की आंख का सपना, किसी की आंख में जागे
©मनीषा शुक्ला
4 Feb 2021
तुम्हारा फ़ोन आने पर
बहुत होती है रुसवाई, तुम्हारा फ़ोन आने पर
हुआ सिग्नल भी हरजाई, तुम्हारा फ़ोन आने पर
तुम्हारी एक फ़ोटो से हुआ रंगीन मोबाइल
चहक उट्ठी है तन्हाई, तुम्हारा फ़ोन आने पर
1 Jul 2020
चिकित्सक (Doctors' Day)

वो धरती पर मानवता का प्रथम उपासक होता है
उसका हर इक स्पर्श हमेशा जीवन रक्षक होता है
जीवन देने से मुश्किल है जीवन की रक्षा करना
इस धरती पर उस ईश्वर का रूप चिकित्सक होता है
©मनीषा शुक्ला
उसका हर इक स्पर्श हमेशा जीवन रक्षक होता है
जीवन देने से मुश्किल है जीवन की रक्षा करना
इस धरती पर उस ईश्वर का रूप चिकित्सक होता है
©मनीषा शुक्ला
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11 Apr 2019
तुम्हारे प्यार की मीठी रसीदें याद हैं अब भी
11 Dec 2018
कैसा है
अब मौजों से दूर समंदर कैसा है
बाहर छोड़ो, अंदर-अंदर कैसा है
माना तुमने सारी दुनिया जीती है
हमसे हारो, देखो मंज़र कैसा है!
© मनीषा शुक्ला
बाहर छोड़ो, अंदर-अंदर कैसा है
माना तुमने सारी दुनिया जीती है
हमसे हारो, देखो मंज़र कैसा है!
© मनीषा शुक्ला
2 Dec 2018
ज़ुबाँ से इश्क़ होता था वो उर्दू का ज़माना था
1 Jan 2018
नूतन वर्ष
लिए लघुता अगर जीवन उचित आदर्श हो जाए
हमारा नाम भर सुनकर किसी को हर्ष हो जाए
किसी की मुस्कुराहट मोल लें आंसू अगर अपने
सफल हर अर्थ में ही तब ये नूतन वर्ष हो जाए
© मनीषा शुक्ला
हमारा नाम भर सुनकर किसी को हर्ष हो जाए
किसी की मुस्कुराहट मोल लें आंसू अगर अपने
सफल हर अर्थ में ही तब ये नूतन वर्ष हो जाए
© मनीषा शुक्ला
4 Oct 2017
मेरी ज़िंदगी
अब संवरने लगी है मेरी ज़िंदगी
इश्क़ करने लगी है मेरी ज़िंदगी
मुझको जीना सिखाने चली थी मग़र
तुमपे मरने लगी है मेरी ज़िंदगी
© मनीषा शुक्ला
इश्क़ करने लगी है मेरी ज़िंदगी
मुझको जीना सिखाने चली थी मग़र
तुमपे मरने लगी है मेरी ज़िंदगी
© मनीषा शुक्ला
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