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27 May 2021

इसलिए चाँद रोज़ जगता है

फिर किसी के लिए सुलगता है
रात भर रोज़ सबको ठगता है
खो गया है बाँह का तकिया
इसलिए चाँद रोज़ जगता है

©मनीषा शुक्ला

22 Mar 2021

तो फिर किस काम का है दिल ?

तुम्हारा ही तुम्हारा है, हमारा नाम का है दिल

फ़िदा रंगीनियों पर है, किसी गुलफ़ाम का है दिल

बला से टूटता है तो किसी दिन टूट ही जाए

अगर तुम पर नहीं आया तो फिर किस काम है दिल

©मनीषा शुक्ला


17 Mar 2021

हमें बदनाम करने में कोई मशहूर हो जाता

हमारी आँख का काजल, किसी का नूर हो जाता

वफ़ा से बेवफ़ाई का यही दस्तूर हो जाता 

किसी के काम आ जाती अगर रुसवाइयाँ अपनी

हमें बदनाम करने में कोई मशहूर हो जाता 

©मनीषा शुक्ला


15 Mar 2021

हमें बदनाम करने में कोई मशहूर हो जाता

हमारी आँख का काजल, किसी का नूर हो जाता
वफ़ा से बेवफ़ाई का यही दस्तूर हो जाता
किसी के काम आ जाती अगर रुसवाइयाँ अपनी
हमें बदनाम करने में कोई मशहूर हो जाता


© मनीषा शुक्ला

9 Mar 2021

किसी के भी नहीं होते

किसी से भी बिछड़कर हम कभी भी क्यों नहीं रोते
घड़ी भर ख़्वाब को भरकर नज़र में क्यों नहीं सोते
अजब उलझी पहेली हैं, अधूरे हैं न पूरे हम
सभी को चाहते हैं पर किसी के भी नहीं होते

©मनीषा शुक्ला

5 Feb 2021

यही सबकी कहानी है

नहीं  चलती  खिलौनों  की  कभी  तक़दीर के  आगे

जुड़े   हैं  आसमानों   में   कहीं   पर   प्रीत के   धागे

यही  है  बेबसी  सबकी,   यही   सबकी   कहानी  है

किसी की आंख का सपना, किसी की आंख में जागे


©मनीषा शुक्ला


4 Feb 2021

तुम्हारा फ़ोन आने पर

बहुत होती है रुसवाई, तुम्हारा फ़ोन आने पर

हुआ सिग्नल भी हरजाई, तुम्हारा फ़ोन आने पर

तुम्हारी एक फ़ोटो से हुआ रंगीन मोबाइल

चहक उट्ठी है तन्हाई, तुम्हारा फ़ोन आने पर

©मनीषा शुक्ला

10 Apr 2018

ज्ञान की गुरुता

हमें माँ का मिले आशीष, जीवन धन्य हो जाए
समझ दायित्व जीवन का, मनुज चैतन्य हो जाए
इसी नव-चेतना में ज्ञान से साक्षात हो ऐसे
रहे बस ज्ञान की गुरुता, सभी कुछ अन्य हो जाए

© मनीषा शुक्ला