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4 Sept 2021

नींद की गर जान ले लो

तुम्हारा ख़्वाब ज़िंदा रह सकेगा

हमारी नींद की गर जान ले लो

---मनीषा शुक्ला

27 May 2021

केवल हमारी याद आती है

तुम्हारे बिन, तुम्हारे साथ रहने में मज़ा ये है

अकेले में हमें  केवल हमारी  याद  आती  है 

©मनीषा शुक्ला

4 Mar 2021

वक़्त देरी कर रहा है

हमें जल्दी नहीं कोई, मग़र हाँ!

हमारा वक़्त देरी कर रहा है

©मनीषा शुक्ला

6 Jan 2021

सच बोल देता है

 रहे ख़ामोश राही, क़ाफ़िला सच बोल देता है

सदा मंज़िल पे आके रास्ता सच बोल देता है 


©मनीषा शुक्ला




13 Jul 2020

मुक़र्रर था, मग़र मुमकिन नहीं था!



तुम्हारे बाद, तुमको भूल जाना
मुक़र्रर था, मग़र मुमकिन नहीं था!

©मनीषा शुक्ला

28 Jun 2020

प्यास



हरेक बूँद में दरिया ही नज़र आता था
हमारी प्यास को पानी ने यूँ तराश दिया

©मनीषा शुक्ला

14 Jun 2020

ज़िन्दगी

ख़्वाब को ख़्वाब की मानिंद दिखाया होता
ज़िन्दगी! ढंग से जीना तो सिखाया होता

©मनीषा शुक्ला

12 Jun 2020

एहसास



किसी ख़ुश्बू के जैसा है तेरे एहसास का होना
तुझे पाना भी मुश्किल है, तुझे खोना भी मुश्किल है

©मनीषा शुक्ला

5 May 2020

उम्र भर तुमको गुनगुनाएंगे



मेरे गीतों में आ बसों हमदम
उम्र भर तुमको गुनगुनाएंगे

©मनीषा शुक्ला

4 May 2020

नींदों के घर यादों का हंगामा है



सपनों का दमन आँखें कैसे थामें
नींदों के घर यादों का हंगामा है

©मनीषा शुक्ला

3 May 2020

हमको तुमसे कहना है


दिल को हमसे, हमको तुमसे कहना है
इन सपनों को उन आँखों में रहना है

©मनीषा शुक्ला

30 Apr 2020

मेरे ख्वाबों से मत भरो आँखें



मेरे ख्वाबों से मत भरो आँखें
ये तुम्हें रात भर जगाएंगे

©मनीषा शुक्ला

29 Apr 2020

अनबन



आज मेरी इन दो आँखों में फिर से थोड़ी अनबन है
एक ने तुमको देखा है और एक तुम्हारा दरपन है

© मनीषा शुक्ला

3 Nov 2019

ख़्वाब

हमें आए भला अब नींद कैसे
हमारा ख़्वाब मुमकिन हो रहा है

© मनीषा शुक्ला

16 Oct 2019

उत्तर में अभियोग



औषधियों की काया से ही तन को भीषण रोग मिलेगा,
जिज्ञासा ने प्रश्न किया तो उत्तर में अभियोग मिलेगा !

©मनीषा शुक्ला

14 May 2019

चोट खाना सीखते हैं

देखकर कोई सहारा लड़खड़ाना सीखते हैं
इक उमर में फूल से सब चोट खाना सीखते हैं

© मनीषा शुक्ला

26 Apr 2019

धरती की मनुहार

कितने सारे पनघट रीते, कितनी ही नदियां हार गईं
लेकिन बादल के कानों तक, कब धरती की मनुहार गई?

© मनीषा शुक्ला

16 Mar 2019

तुम्हारी याद का सामान

तुम्हारी याद का सामान होना
सफ़र की मुश्किलें आसान होना

© मनीषा शुक्ला

3 Mar 2019

बहुत कठिन है

प्यासा होना बहुत सरल है, बहुत कठिन है पनघट होना
जीवन होना बहुत सरल है, बहुत कठिन है मरघट होना

© मनीषा शुक्ला

21 Jan 2019

रोज़ लिखते हैं उसे

रोज़ काग़ज़ पे वही ज़ख़्म हरा करते हैं
रोज़ लिखते हैं उसे, रोज़ पढ़ा करते हैं

©मनीषा शुक्ला