7 Oct 2017

शब-ए-वस्ल

ये मत पूछ शब-ए-वस्ल मेरा हाल क्या है
यही जवाब है मेरा, तेरा सवाल क्या है?

© मनीषा शुक्ला

4 Oct 2017

मेरी ज़िंदगी

अब संवरने लगी है मेरी ज़िंदगी
इश्क़ करने लगी है मेरी ज़िंदगी
मुझको जीना सिखाने चली थी मग़र
तुमपे मरने लगी है मेरी ज़िंदगी

© मनीषा शुक्ला

3 Oct 2017

जुदा नहीं तुझसे

जा तू इत्मिनान रख, खफ़ा नहीं तुझसे
दूरी हुई तो क्या मग़र जुदा नहीं तुझसे

© मनीषा शुक्ला

7 Sept 2017

लगी जीने जो तुम से दूर होकर



बहुत ख़ाली मिली भरपूर होकर
लगी जीने जो तुम से दूर होकर

ख़ताओं इन्तेज़ारी ख़त्म कर लो
सजाएं आ गईं मंज़ूर होकर

छुआ जिस पल मुझे तुमने, तभी से
मैं देखूँ आईना मग़रूर होकर

तुम्हारी क़ुर्बतें तुमको मुबारक
बहुत खुश हूं मैं तुमसे दूर होकर

मिली उनसे नहीं "हां" में गवाही
मैं "ना" कहती रही मजबूर होकर

तुम्हारे लब पे हैं ग़ैरों के चर्चे
हमें हासिल यही मशहूर होकर

दिया कब वक़्त उनको मौत ने जो
जिए मसरूफियत में चूर होकर

© मनीषा शुक्ला

28 Aug 2017

प्यास का आदर

प्रीत के अनुप्रास का आदर किया
आज जल ने प्यास का आदर किया

नेह का सत्कार जब तुमने किया
उंगलियों ने थाम लीं तब उंगलियां
इक पहर तक थी अकेली नींद, अब
साथ इनके आस, सपने, लोरियां
चैन ने संत्रास का आदर किया
आज जल ने प्यास का आदर किया

हम विकलता के सजीले चित्र थे
और तुम तपलीन विश्वामित्र थे
हम अभागी भूमिजा युग-युग रहीं
तुम सदा श्रीराम थे, सौमित्र थे
धीर ने उच्छवास का आदर किया
आज जल ने प्यास का आदर किया

© मनीषा शुक्ला

26 Jul 2017

अनबन

आज मेरी इन दो आंखों में फिर से थोड़ी अनबन है
एक ने तुमको देखा है और एक तुम्हारा दरपन है

© मनीषा शुक्ला

25 Jul 2017

अकेलापन

ज़िन्दगी में थोड़ा अकेलापन बहुत ज़रूरी है। क्योंकि यही वो जगह है जहां आपकी मुलाक़ात आपसे होती है।

© मनीषा शुक्ला