हमारी आँख का काजल, किसी का नूर हो जाता
वफ़ा से बेवफ़ाई का यही दस्तूर हो जाता
किसी के काम आ जाती अगर रुसवाइयाँ अपनी
हमें बदनाम करने में कोई मशहूर हो जाता
©मनीषा शुक्ला
हमारी आँख का काजल, किसी का नूर हो जाता
वफ़ा से बेवफ़ाई का यही दस्तूर हो जाता
किसी के काम आ जाती अगर रुसवाइयाँ अपनी
हमें बदनाम करने में कोई मशहूर हो जाता
©मनीषा शुक्ला
नहीं चलती खिलौनों की कभी तक़दीर के आगे
जुड़े हैं आसमानों में कहीं पर प्रीत के धागे
यही है बेबसी सबकी, यही सबकी कहानी है
किसी की आंख का सपना, किसी की आंख में जागे
©मनीषा शुक्ला