जागते रहना तुम्हारा काम था; तुमने कहा था
सूर्य हो तुम इस सदी के!
हां; ज़रा सा कम सही लेकिन यहां उजियार तो था
था सितारों पर भरोसा; चांद से कुछ प्यार तो था
तुम चले आए बताने रोशनी के चोर हैं सब
पर हमारे हाथ में कुछ रात का उपचार तो था
रोशनी की लूट में थोड़े - बहुत शामिल रहे सब
तुम मगर सौ फ़ीसदी थे !
पेट भरने को चले सबका; भुनाई भूख अपनी
बोरियों पर अन्न के तुमने छपाई भूख अपनी
नोट बदले पर न बदली भूख की सूरत, मगर हां
पीठ पर कानून के तुमने उगाई भूख अपनी
शक्ल रोटी की किताबों में छपी है; और बच्चे
गीत गाते त्रासदी के!
थी बुरी आदत किसी की; आपकी नीयत बुरी है
आपको चस्का लहू का, और उनकी बांसुरी है
वो हमें सपने दिखाकर आसमां के; तोड़ते हैं
पर सियासत आपकी सच की ज़मीं ही ले उड़ी है
वो गए थे चूक भरसक नेकियों की ले सहूलत
तुम नहीं चूके बदी से !